Megh: An ancient race a.

Megh: An ancient race a.
एलेग्जेंडर से मुकाबला करने वाली कौमों में मल्ल या मल्लोई (मेघ)लोगों का जिक्र एलेग्जेंडर के इतिहासकारों ने किया है। जिसका पहले जिक्र किया जा चूका है। उनके वर्णानुसार मल्लोइ से मगोइ/मेगोइ/ मेघ लोग उसी जातीय समूह से थे। यह भी बताया जा चूका है। ओस्टियाक लोगों के साथ इनका वर्णन एशिया के इतिहास में मिलता है। मेघ लोग सिन्धु तट पर रहने वाले इन्ही मलोई लोगों में बताये गए। सिंध से उनका विस्थापन होने पर वे सिंध के ही गुजरात और राजस्थान के थल में आ गए। विभिन्न समय पर विभिन्न समूहों में आये।
वर्तमान बाड़मेर में उनका आगमन सिकंदर के समय से मिलता है। बाद में कासिम के समय फिर बड़ा आव्रजन हुआ। उसके बाद भी होता रहा। मल्ल लोगों के आधिपत्य के कारण इस क्षेत्र का नाम मालानी पड़ा अर्थार्त मल्ल लोगों का क्षेत्र।
बाद में सलखा के पुत्र ने इस क्षेत्र पर आधिपत्य बनाया,पर क्षेत्र का नाम वही रहा। मल्लो (मेघों) में से अलग होकर कुछ लोग राजपूत घेरे में गए। कर्नल टॉड के विचार में राठौर और चौहान राजपूत इन्ही मल्लों से निकले। सत्य जो भी हो, कर्नल टॉड की कृति "अनाल्स एंड एंटिक्विटी ऑफ़ राजस्थान" के तीसरे वॉल्यूम की कुछ टिप्पणियाँ नीचे दी जा रही है, जो विचारणीय है-
Barmer or Mallani- "--whole of this region was formerly inhabitated by a tribe called malli, or mallani,who, although asserted by some to be rathore in origion, are assuredly chauhan, and of the same stock as the ancient lords of Juna Chhotan.-----" page-1272 .
"Sonagir, the ' golden maintenance' is the more ancient castle, and was adopted by chauhans as distinctive of their tribe when the older term, mallani was dropped for sonigira. Here they enshrined their tutelary divinity, mallinath, 'God of mallis,' -----when the name of sonigir was exchanged for that of jalor, -----divinity of Jalandharnath was imported from Ganges or left as well as the God of the malli by the ci- devant mallanis, is uncertain. BUT prove to be remnant of foes of Alexander, driven by him from Multan.----"page- 1266.
At footnote on page- 1266, he speaks- "Multan and Juna ( chhotan...) have the same significance, the ancient abode and both were occupied by the tribe of malli or mallanis, said to be -----"
Also at page 1279 he writes- "we must describe the descendants of the Malli, foe of Alexander, or of the no less heroic Prithviraj, as a community of thieves, who used to carry their raids into Sindh, Gujarat and Jared, to arrange themselves on private property----" and so on.
Refefence: James Tod, Annals and Antiquities of Rajasthan or the central and western Rajput states of India," Volume-3, book- 1, Oxford university press, London, 1920.

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें