Coins of Azes Meg. महाराजा अजोस् मेग के सिक्के!

Coins of Azes Meg. महाराजा अजोस् मेग के सिक्के!
अज/अजो/अजय- 
इसका राज्य वर्तमान पंजाब, काबुल, गांधार/अफगानिस्तान, पेशावर और ...युनान के कई प्रदेशों आदि पर था। जहाँ पर इनके सिक्के पाये गए!
अज कौन था?- 
प्रायः सभी इतिहासकार यह लिखते है कि उस राजा ने 'मेग' उपाधि धारण की थी। वह अपने आप को मेग कहता था और उसके सिक्कों पर यह विरुद खुदा हुआ है। उसने संवत भी प्रारंभ किया। जो मालवा आदि प्रदेशो में प्रचलित है, जो विक्रम संवत ही है।
प्रोफेसर विल्सन उन्हें पूर्णतः भारतीय मानते है। वह बुध्द उपासक था। उसे भारतीय बौद्ध कहा गया है, जिसका यूनान पर भी शासन था।
उसके सिक्कों की भाषा और लिपि के बारे में यह स्पष्ट हुआ है कि वह ग्रीक और पालि है। उसके सिक्कों पर एक तरफ उसका चेहरा व दूसरी तरफ विभिन्न पशुओं की आकृतियां आदि है।
वह किस प्रजाति का था। इस पर सभी एक मत नहीं है। बल्कि ज्यादातर की मान्यता यह है कि वह इंडो-सीथियन था। सीथियन कोई प्रजाति नहीं थी। बल्कि वर्तमान मध्य एशिया जिसकी सीमाएं सौराष्ट्र, पंजाब, तिब्बत आदि तक थी, में निवास करने वाले लोगों को कहा गया है। पंजाब और काबुल पर उसके बाद उसकी पीढ़ियो का अधिकार रहा।
उसके राजवंश को इंडो-पार्थियन लोगों ने नष्ट किया। जो बाद में पहलवी या बल्हारा कहलाये।
रामायण/ महाभारत आदि ग्रंथों में उन्हें बाह्य कहा गया है- वेद बाह्य! उन्हें यदु कुल के चंद्र वंश से जोड़ा गया है।
उज्जैन के विक्रमादित्य का भी जिक्र है, परन्तु उसका कोई सिक्का या अन्य अभिलेख नहीं मिला।
महाराजा अज या अजो या अजय की ऐतिहासिकता प्रमाणित है। उसके सिक्कों के कुछ नमुने..
अधिक जानकारी के लिए मेघवंश: इतिहास और संस्कृति भाग 4(प्रकाशनाधीन देखें)





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