Read the history analytically--- Brahmans and Kasim----सिंध का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक इतिहास "चचनामा" माना जाता है।

Read the history analytically--- Brahmans and Kasim----सिंध का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक इतिहास "चचनामा" माना जाता है। उसमे कई महत्वपूर्ण सूचनाएं है। भारत किंवा सिंध पर मुसलमानों के प्रथम आक्रमण का भी इसमे सविस्तार जिक्र है। कासिम के आक्रमण के समय सिंध का राजा दाहिर मारा गया। उसकी पत्नी को ब्राह्मणों ने ही आक्रमणकारी को सौंपा।
हारी हुई प्रजा पर कई बंदिशे लागु हुई। कुछ लोग उनकी सेना में भर्ती हुए। वे भी मुस्लमान बनकर ही हो सकते थे। यह वो ही वर्ग था जो आज अपने को क्षत्रीय नहीं बल्कि तथाकथित राजपूत कहता है। कई प्रकार के टेक्स लगे।
चालक ब्राह्मण राजा दाहिर के क़त्ल के बाद कासिम के आगे सर मुंडाकर सेवा में हाजिर हुए। 'राज' की सेवा का वादा किया। टेक्स से उन्मुक्तियाँ पाई। उनके द्वारा यह विशेषाधिकार या आरक्षण इस आधार पर हासिल किया कि वे हिन्दुओं में सर्वोच्च है। हिन्दू उनका बहुत आदर करते है आदि आदि तर्क दिए। कासिम ने उन्हें आरक्षण या विशेषाधिकार दे दिए। बदले में वे जगह जगह जाकर कासिम के लिए काम करते। साधारण जनता पर ब्राह्मणों का प्रहार और तेज हो गए। ब्राह्मणों द्वारा राष्ट्रद्रोह और गद्दारी का यह एतिहासिक प्रमाण चचनामा में है।
चच नामा और तारीख-ए-हिन्द वा सिंध के वर्णन को इससे मिलाये और सच्चाई देखे। Historians of Sind भी देखे । here under pages are quoted from " the history of India- as told by its own historians,volume-1,by sir H.M. Elliot
"The relations of Dahir are betrayed by the Brahmans" page-84
"The Brahmans come to Muhammad Kasim" page- 84-85
" ladi, the wife of Dahir is taken with his two maiden daughters" page- 84, and many more conspiracies and c.'


Read the History Analytically----जैसलमेर की रियासत के भाटी राजपूतों में शुमार भाटी एक राजपूत कौम कही जाती है। ये अपना वतन वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान/ सिंध बताते है और वहां से जैसलमेर आना बताते है। भट्तिप्रोल का भी कभी कभार जिक्र किया जाता है। अपने को यदुकी औलाद और चन्द्र वंशी कहते है।
सत्य जो भी हो परन्तु अफ़ग़ानिस्तान और सिंध के प्राचीन इतिहास में उनको भगवान बुद्ध का परम अनुयायी कहा गया है। भाटी का अर्थ ही बुद्ध लिया जाता था। ये बाद में कभी मुस्लमान बनते है। राज करते है। कभी ब्राह्मणवादी हिन्दू बनते है। राज करते है। धर्म बदलने का इनका कोई सनी नहीं। चचनामा से लेकर आधुनिक भाटी वंश के गौरवशाली इतिहास में यह बात उभर ही जाती है। उस पर विमर्श आवश्यक नहीं।
यदु को जदु भी लिखा और बोल जाता है। यह जदु जाति - "" ------- Gadun or jadun tribe. These gaduns represent the great Yadu tribe, which according to Tod ("Analas of Rajasthan "), was the most illustrious of all the tribes of India," their name become the patronymic of the descendants of BUDDHA, progenitor of Lunar race.---------- in zabul country they adopted the name of bhatti' -----since their conversion to Islam this name name has been changed to Jam, which is petty Jareja princes of Las Bela in balochistan." P-87
" from the Indus the bhati got possession of Punjab--------expelled thence they retired into the great Indian desert, and there established a succession of colonies, of which Jaisalmer is the chief, in 1157A.D. -----------lunar race of the Rajput of India, who represent the anccient Buddhists; while solar race of Rajput represent the Brahmans." Page- 22 and many more in the- "An enquiry into the ethnography of AFGHANISTAN" By H.W. Bellew, Published in 1891


Engracia in ancient India or betrayals-
" सिंध के जीते जाने के बाद कुछ ब्राह्मण मिलकर मुहम्मद बिन कासिम के पास गए थे। मुहम्मद कासिम ने उन लोगों को अच्छा आदर किया। ब्राह्मणों ने उससे यह कहा कि हिन्दुओं में जैसा दस्तूर है, हमारी जाति का स्थान और सब जातियों से ऊँचा रखा जाय। जाँच करने के बाद मुहम्मद कासिम ने इन लोगों की यह बात मान ली और इनको राज्य के सब पदों पर स्थान दिया। ब्राह्मणों ने इसके लिए धन्यवाद दिया; और गाँव-गाँव घूमकर अपने हकीमों के गुण गाए, उन्हें जो अधिकार मिले थे, उनके लिए सब जगह उनकी बहुत प्रशंसा की।"
Reference: 'चच नामा", ईलियट क कृत अंग्रेजी अनुवाद, पृष्ठ 182-184,

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें